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Monday, March 9, 2009

आया फागुन 09


रंगों के ख़त बटता, आया फागुन द्वार
प्रेम-रंग का ख़त दिया, उसने अबकी बार

झांके घुघंट ओट से, हौले - से कचनार
भोरे करते प्यार से चुबन की बौझार

चुनर ओड़कर जयपुरी, नाचे सरसों आज
देख अदाए मदभरी,मौसम करता नाज

फागुन केसर ताल मे, डुबो गया ये देह
कानो मे रस घोलते, फाल्गुन के अब गीत

रंगों के इस त्यौहार मे जब देखा नीला रंग
याद उसकी आ गयी जो मेरा था सबसे करीब

सत-सत् नमन उनको मेरा ,
होठ चूमकर प्यार से, निभा गए जो प्रीत |


मेरा जीवन का अध्यापक *

Thursday, August 28, 2008

मेरी ख्वाहिश


मुझे वहाँ जाना हैं,
जहाँ मेरा साया भी
मेरे साथ न हो,
मुझे वहाँ जाना हैं,
जहाँ अतीत का कोई
नमो-निशान न हो,
मुझे वहाँ जाना हैं,
जहाँ चाहत, नफ़रत, बेरुखी
और प्यार भी न हो,
सभी को देखा,
कभी न कभी तो,
आपको भी महसूस हुआ होगा,
की वह वहाँ पर हो,
जहाँ कोई न हो ............

Making a million friends is not a miracle, the miracle is to find a friend who will stand by U when a million are against U !!!