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Thursday, January 22, 2009

क्या तुमने सुना हैं..!!!


सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं….
कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है.
किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है
झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है…..

बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको,
सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको.
पर वो कुछ लम्हें आज भी वहीं ठहरें हैं,
आधी रातों को हमने इन्हे महकते हुए देखा है……

सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं….
कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है.
किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है
झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है…..

वो फसाना झूठ नहीं हो सकता जो ख़ुद तूने कहा था,
वो सब ख्वाब नहीं हो सकता जो देखा इन आँखों नें..
तेरी वफ़ा पर कैसे सवाल करूँ मैं,
पर बदलते वक़्त के साथ तुझे मैने बदलते हुए देखा है…

सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं….
कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है.
किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है
झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है…..

हाँ मैंने वक्त को बदलते हुए देखा हैं और तुमने ......?