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Thursday, November 13, 2008

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं.
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा.
जीवन का एक ऐसा साथी है,
जो दूर हो के पास नहीं.
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं.
हवा का एक सुहाना झोंका है,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा.
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा.
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र,
जो समंदर है, पर दिल को प्यास नहीं.
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं.
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है.
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है.
यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं.
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं..........

Friday, July 25, 2008

शूल से शब्द

चुभते शूल से शब्द
किसी फूल से नाज़ुक एहसास को
मुरझा देने पर मज़बूर कर देते हैं
और बाग़ में बचतीं हैं कुछ सूखी सी पत्तियां
और माली सोचता हुआ
कि आखिर साथ साथ चलते हुए
क्यों घायल कर जाते हैं
दो साथी एक दूसरे को,

शायद अपने अस्तित्व को बचाने के लिए
दूसरे को घायल करना ज़रूरी था........

Making a million friends is not a miracle, the miracle is to find a friend who will stand by U when a million are against U !!!