Thursday, August 7, 2008

अब जिंदगी सुलझ चुकी है


हाँ,अब मेरे पास कोई सवाल नहीं है।
मेरे सारे सवालो के जवाब,
मुझे मिल चुके है।
अब जिंदगी सुलझ चुकी है,
सरल हो चुकी है।
मै अपनी तलाश बंद कर चुका हूँ।
जीवन के प्रति प्रश्नो की धार..
बहूत ऊँचाई से गिरकर,
समाधान का जलप्रपात बन चुकी है।
वरना लंबी हो चली थी प्रश्नावली,
जैसे धडकनो/साँसो की यात्रा,
या फिर शब्दो के आभाव से,
खिंचती चली जा रही कविता की तरह,
किंतु अब पूर्ण विराम है,
केवल पूर्ण विराम।
मिट चुके है, प्रश्नचिन्ह,
धूमिल,बिलकुल खत्म से,
कि जिदंगी क्या है?
समाधान/जवाब/जिदंगी..
है,मेरी कविता की डायरी।
मुझे याद हैकि मैने,
उस दिन से जीना शुरु किया था,
जब अकेलेपन से भडभडाकर,
पहली कविता को लिखा था।
अकेलापन दूसरी,तीसरी..
और पाँचवी कविता के साथ खत्म हुआ।
खामोशी को ,
आलोचनाओ/प्रंशसाओ ने घेर लिया।
फिर मै स्वयं से ही कहने लगा अपने अहसास,
छटवी मे कष्ट, तो आठवीं में खुशी का इजहार।
नौवी कविता से वो मेरे जीवन में आई,
दसवी तक मेरे सम्पूर्ण मे समाई,लेकिन
ग्यारहवी से लगा जैसे कि लौट जाऊ?
पर जिंदगी से कोई कैसे लौटे?
वो मेरी थी,
लगता था वो मेरी थी।
तेरह,पन्द्रह से लेकर अतिंम पृष्ठ तक।
चलता रहा ये सब बीस तक,
जोडता रहा मै सपने उन्तीस तक।
लगता है,अब ये गर्माहट खत्म हो जायेगी,
अहसासो पर बर्फ जम जायेगी।
तीस में,वो मुझे छोडकर चली जायेगी।
उसके बाद...
ढेर से खाली पृष्ठ...
अब मै फिर से उलझ चुका हूँ,
सवालो को पुनः फैला चुका हूँ,
समाधान उड चुके है,
मै उन्हे उडते हुए देख रहा हूँ,
sourc:yaksh parshan

Making a million friends is not a miracle, the miracle is to find a friend who will stand by U when a million are against U !!!

7 comments:

रश्मि प्रभा said...

जीवन के प्रति प्रश्नो की धार..
बहूत ऊँचाई से गिरकर,
समाधान का जलप्रपात बन चुकी है।.......
par punah ulajh gai, is satya ko bakhoobi bataya

Dr. Uday 'Mani' Kaushik said...

एक शशक्त रचना के लिए बहुत बहुत बधाई के साथ ही

नये ब्लॉग के लिए बहुत बहुत बधाई साथी

मैं इन पंक्तियों से अपना परिचय कराऊंगा की

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा

आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ..

आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा

हिन्दी की उत्कृष्ट कविताओं ,ग़ज़लों , रचनाओं के लिए देखिएगा
http://mainsamayhun.blogspot.com

Mrs. Asha Joglekar said...

Welcome to blog jagat. Aap ki rachana bahut sashakt hai. Badhai.

हिंदी-लेखक said...

नए चिठ्ठे के लिए बधाई हो !
आशा रखता हूँ कि आप भविष्य में भी इसी प्रकार लिखते रहे |
आपका
विजयराज चौहान (गजब)
http://hindibharat.wordpress.com/
http://e-hindibharat.blogspot.com/
http://groups.google.co.in/group/hindi-bharat?hl=en

Amit K. Sagar said...

क्या बात है.! बहुत खुबसूरत. लिखते रहिए.
---
यहाँ भी आयें;
उल्टा तीर

Amma said...

जिदंगी..
है,मेरी कविता की डायरी।
.....
sach me hamare shabd hi zindagi hain

सजीव सारथी said...

नए चिट्टे की बधाई, लिखते रहें, और हिन्दी ब्लॉग्गिंग को समृद्ध करते रहें...
शुभकामनायें

आपका मित्र
सजीव सारथी